Wednesday, 23 March 2016

Nostradamus Prediction for India in Hindi

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी भारत और दुनिया के लिए क्या कहती हैं 



ये हम नहीं जानते ,कल हमारे साथ क्या होने वाला है , कल क्या , अगले ही पल हमारे साथ क्या घटित हो सकता है ये हम नहीं जानते। दुनिया भर में भविष्य को जान सकने के अनगिनत तरीके हैं, जो यह दावा करते हैं कि वे सटीक ही हैं। लेकिन क्या आप इन पर विश्वास करते हैं?

परन्तु आज हम जिस शख़्स के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उन्होंने अपनी ज़िंदगी में काफी सारी भविष्यवाणियां की। और वह सभी सत्य भी हुईं, यदि उनकी भविष्यवाणी के आधार पर कदम उठाए जाते तो आज ना जाने कितनी ही जानें बच सकती थीं।

ये शख़्स हैं, महान भविष्यवक्ता ‘नास्त्रेदमस’ ! फ्रांस के एक 16वीं (1503-1566) सदी के जाने माने भविष्यवक्ता । एक ज़माने में डॉक्टर एवं शिक्षक भी रह चुके थे। ये प्लेग जैसी बीमारियों का इलाज करते थे।आपको जानकर हैरानी होगी,  नास्त्रेदमस किसी साधारण तरीके से नहीं, बल्कि अपनी कविताओं से भविष्य में होने वाली घटनाओं की ओर इशारा करते थे।

नास्त्रेदमस की सैकड़ों भविष्यवाणियों में से बहुत सी सत्य हो चुकी हैं। दुनिया भर की प्रसिद्ध हस्तियों के साथ-साथ नास्त्रेदमस ने कुछ प्रचलित भारतीय हस्तियों की भी भविष्यवाणी की थी, जो सच भी हुईं। उन्होंने राजीव गांधी की हत्या से लेकर विश्व युद्ध तक की भविष्यवाणी की, और आश्चर्य की बात यह है कि यह सभी भविष्यवाणियां सच हो गईं, लेकिन कैसे?

आखिर नास्त्रेदमस कैसे जान पाते थे आने वाले कल को ? इस बात का खुलासा करने से पहले आज हम यहां आपको नास्त्रेदमस की उन भविष्यवाणियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि सच हुई हैं और उन्होंने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

आश्चर्य की बात है लेकिन नास्त्रेदमस ने कई वर्ष पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत की राजनीति में एक ऐसा शख़्स आएगा जो राजनीति के संदर्भ को हिलाकर रख देगा। और यह भविष्यवाणी नरेंद्र मोदी के लिए ही थी।



नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के जानकारों का कहना है कि मोदी के शासन में भारत बनेगा विश्व की महाशक्ति। भारत का कायापलट हो जाएगा और दुश्मन राष्ट्रों का वजूद मिट जाएगा।


बेहद अचंभित करने वाली नास्त्रेदमस की यह भविष्यवाणी भी सच हुई थी। उनकी भविष्यवाणी में लिखा गया था कि राजाज्ञा से एक उत्तम वायु चालक अपना पेशा छोड़कर देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हो जाएगा। सात सालों तक ख्याति प्राप्त करने के पश्चात उसका ऐसा अंत होगा, जो रोंगटे खड़े कर देगा।

और हुआ भी कुछ ऐसा ही, राजीव गांधी के सत्ता की कुर्सी पर विराजमान होने के बाद भारत ने अचानक तरक्की की ओर कदम बढ़या। लेकिन उनके प्रधानमंत्री बनने के 7 साल बाद ही वर्ष 1991 में उनकी हत्या हो गई थी।

गांधी परिवार की ही शख़्स इंदिरा गांधी की भविष्यवाणी भी नास्त्रेदमस द्वारा की गई, जिसके अनुसार ‘निष्कासित स्त्री’ फिर सत्तारूढ़ होगी। उसके बैरी उसके विरुद्ध षड़यं‍त्र करेंगे। तीन सालों के अपने यादगार कार्यकाल के बाद सत्तर की आयु के लगभग उसकी मृत्यु होगी।

यदि की गई भविष्यवाणी के आधार पर ऐतिहासिक तथ्यों पर गौर करें तो इंदिरा गांधी की भी साल 1977 के आम चुनाव में पराजय हुई थी और जनता पार्टी की सरकार बनी थी। लेकिन 1980 में प्रधानमंत्री बनने के बाद 67 साल की उम्र में उनकी हत्या कर दी गई थी।

शायद दुनिया का सबसे दुखद हादसा, लेकिन भविष्यवाणी पर गौर किया जाता तो यह हादसा टल सकता था। 9/11 वर्ल्ड ट्रेंड सेंटर पर हुए आंतकी हमले से संबंधित नास्त्रेदमस ने जो भविष्यवाणी की थी, उसके अनुसार पृथ्वी के सेंटर को दो बड़े पत्थर तबाह कर देंगे।


इस भविष्यवाणी में न्यूयॉर्क को न्यू सिटी, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को सेंटर ऑफ द अर्थ और ट्विन टॉवर को टू ग्रेट रॉक्स से जोड़ा गया है। यदि इस भविष्यवाणी का अर्थ समझ लिया जाता तो शायद यह हादसा ना होता। क्योंकि ठीक इसी तरह वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को अपहरणकर्ताओं ने दो प्लेन को हाइजैक कर ट्विन टॉवर में क्रैश करा दिया था।

अगली भविष्यवाणी जो हम आपको बताने जा रहे हैं वह फिलहाल घटी नहीं है, लेकिन जल्द ही घटित हो सकती है। और यदि इस भविष्यवाणी के अनुसार कुछ कदम उठाए जाएं तो शायद कुछ रोकथाम हो सकती है।

इस भविष्यवाणी के अनुसार तीसरे विश्वयुद्ध की भूमिका बननी शुरू हो जाएगी। मिडिल ईस्ट दुनिया की जंग का मैदान बन जाएगा, जहां दुनिया भर की ताकतें अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगी।

यहां विश्व की कट्टर विरोधी ताकतें यथा अमरीका और रूस भी मिलकर एक हो जाएंगे और दुनिया में शांति लाने के लिए आतंकवाद के खिलाफ खड़े हो जाएंगे। यह घटना साल 2015 के अंत में और साल 2016 के शुरू में होने की संभावना है।

इसके अलावा नास्त्रेदमस की एक और भविष्यवाणी के अनुसार वर्ष 2015 अमरीका के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इस साल अमरीका को न केवल विश्व की उभरती शक्तियों यथा चीन, रूस और ईरान से चुनौती मिलेगी वरन प्राकृतिक संकटों से भी जूझना पड़ेगा।

अमरीका को इस साल भयावह भूकंप का सामना करना पड़ सकता है। इस भूकंप के फलस्वरूप अमरीका का एक हिस्सा पूरी तरह तबाह हो जाएगा। ज़ाहिर है कि इससे अमरीका को भारी नुकसान होने वाला है, लेकिन देखना यह होगा कि यह भविष्यवाणी कितनी सच होती है।

अमरीका के अलावा नास्त्रेदमस की एक अन्य भविष्यवाणी में यूरोप के लिए भी बुरी खबर है, जिसके अनुसार आने वाले समय में यह देश आर्थिक संकट में घिर जाएगा। फ्रांस, जर्मनी सहित कई बड़े यूरोपियन राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ जाएगी। देखना यह होगा कि इतने बड़े देशों की यह समस्या अन्य देशों पर कितनी असरदार होती है।


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Tuesday, 22 March 2016

Battle of Saragarhi 21 Sikhs warriors story in hindi

अगर आप को इसके बारे मेँ नहीं पता तो आप भारत के इतिहास से बेखबर है



आपने ग्रीक सपार्टा और परसियन की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा ! इनके ऊपर "300" जैसी फिल्म भी बनी है, पर अगर आप "सारागढ़ी" के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई सिख लैँड मेँ हुई थी !

सन 1897, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 10 हजार अफगानोँ ने हमला कर दिया ! वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे ! इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिँघ ने बनवाया था ! इन किलोँ के पास सारागढी मेँ एक सुरक्षा चौकी थी ! जंहा पर 36 वीँ सिख रेजिमेँट के 21 जवान तैनात थे !


ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे ! 36 वीँ सिख रेजिमेँट मेँ केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे  ! ईशर सिँह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानोँ को पहले ही पता चल गया कि 10 हजार अफगानोँ से जिँदा बचना नामुमकिन  है!

फिर भी इन जवानोँ ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैँड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल हो गयी ! जहाँ एक तरफ 10 हजार अफगान थे
तो दूसरी तरफ 21 सिख !



यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और 600-1400 अफगान मारे गये और अफगानोँ की भारी तबाही हुयी ! सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और महाराजा रणजीत सिँघ के इन किलोँ को बचा लिया  और अफगानोँ की हार हुयी जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी !

ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 सिख वीरोँ की बहादुरी को सलाम किया  ! इन सभी 21 सिख वीरोँ को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया 1 जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था !


भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था ! UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया   है! इस लड़ाई के आगे ग्रीक सपार्टा की बहादुरी फीकी पड़ गयी  !

पर दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए  उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है ! ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे यहा जानते तक नहीँ !!


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Sunday, 20 March 2016

Why Do We Pour Water on Shivling in hindi

सूर्य और शिवलिंग को जल चढ़ाने के पीछे छिपा है गहरा विज्ञान



आप देखेंगे कि कई ऐसी मान्यताएं केवल परंपरा के नाम पर निभाई जाती हैं किंतु यदि उनकी गहराई से छानबीन की जाए तो उनके पीछे छिपी वैज्ञानिकता को समझा जा सकता है।

हमारी लगभग सारी धार्मिक मान्यताएं कहीं न कहीं किसी साइंटिफ़िक रीजन की वजह से बनी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सूर्यदेव या शिवलिंग को जल चढ़ाने के पीछे प्योर साइंटिफ़िक रीजन हैं.

हम सूर्य को जल देने की बात करें तो इसके पीछे छिपा है रंगों का विज्ञान। हमारी बॉडी में रंगों का बैलेंस बिगड़ने से कई रोगों के शिकार होने का खतरा होता है। मॉर्निंग में सूर्यदेव को जल चढ़ाने से शरीर में ये रंग संतुलित हो जाते हैं, जिससे बॉडी में रज़िस्टेंस भी बढ़ता है। 


इसके अलावा सूर्य नमस्कार की योगमुद्रा से कॉंसंट्रेशन भी बढ़ता है और रीढ़ की हड्डी में आई प्रॉब्लम सहित कई बीमारियां अपने आप दूर हो जाती हैं। इससे आंखों की समस्या भी दूर होती है। इसके अलावा रेग्यूलर जल चढ़ाने से नेचर का बैलेंस भी बना रहता है क्योंकि यही जल, वेपोरेट होकर सही समय पर बारिश में योगदान देता है।



अगर हम सूर्यदेव को जल चढ़ाने की पूरी क्रियाविधि को ध्यान से देखें तो हमें कुछ बातें स्पष्ट होंगी। ताम्र पात्र में जल भरकर सूर्योदय के पश्चात सूर्य नमस्कार की विशिष्ट योग मुद्रा में जल की धार सिर से चार इंच ऊपर से स्लो मोशन में गिराते हुए जल की धार में से ही सूर्य की प्रकाश रश्मियों को एकाग्रता से देखा जाता है।


इसका लाभ ये है कि आंखों व शरीर को एंटी बैटीरियल डोज मिलने के साथ तरावट भी मिलती है और लंबी अवधि तक उनमें समस्या नहीं उत्पन्न होती। सूर्य नमस्कार की मुद्रा की अगर बात करें तो ये भी अपने आप में कई रोगों का इलाज़ है। इससे मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ने के साथ शारीरिक संतुलन सधता है और रीढ़ की हड्डियों मं विकार नहीं उत्पन्न होते।

अगर हम कुछ और गहराई में उतरें तो हमें पता चलेगा कि रंगों का ये विज्ञान ज्योतिष शास्त्र व रत्न विज्ञान के साथ कहीं अधिक जुड़ता है। रंगों के आधार पर ही रत्नों का चयन किया जाता है, जो अपने-अपने विशेष स्पेक्ट्रम और तरंग दैर्ध्य के अनुसार विशेष ग्रहों को प्रभावित करने में सक्षम होते हैं। किसी भी ग्रह की निगेटिव एनर्जी को विशेष रंग के प्रयोग से परावर्तित या अपवर्तित किया जा सकता है।

अब हम बात करते हैं शिवलिंग पर जल सहित, भांग, धतूरा, बेलपत्र आदि चढ़ाने की। आपको जानकर हैरानी होगी कि शिवलिंग खुद में न्यूक्लियर रिएक्टर का सबसे बड़ा सिम्बल है। इसकी पौराणिक कथा तो ब्रह्मा और विष्णु के बीच एक शर्त से जुड़ी है। शिवलिंग ब्रह्माण्ड का प्रतिनिधि है। जितने भी ज्योतिर्लिंग हैं, उनके आसपास सर्वाधिक न्यूक्लियर सक्रियता पाई जाती है।

यही कारण है कि शिवलिंग की तप्तता को शांत रखने के लिए उन पर जल सहित बेलपत्र, धतूरा जैसे रेडियो धर्मिता को अवशोषित करने वाले पदार्थों को चढ़ाया जाता है।


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Thursday, 17 March 2016

पाताल भुवनेश्वर एक रहस्यमी गुफा

पाताल भुवनेश्वर गुफा में दुनिया के समाप्त होने का रहस्य छुपा  है




सनातन पथ ब्लॉग आज आपको एक ऎसी गुफा के बारे में बता रहा है जो उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में गंगोलीहाट कस्बे में है, यह एक रहस्यमयी गुफा है। इस गुफा से ऎसी  मान्यताएं जु़डी हैं, जिनका उल्लेख पुराणों में भी किया गया है। गुफा के बारे में बताया जाता है कि इसमें दुनिया के समाप्त होने का भी रहस्य छुपा है। इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर के नाम से जाना जाता है।

पाताल भुवनेश्वर गुफा के बारे में कहा जाता है कि पाण्डवों ने इस गुफा के पास तपस्या की थी। काफी समय तक लोगों की नजरों से दूर रही  इस रहस्यमयी गुफा की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी।

गुफा के अंदर -

 1 : - गणेश जी का सिर जो उस कथा की याद दिलाता है, जब भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया था।

 2 : - इस गुफा में चार खंभा है जो चार युगों अर्थात सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग को दर्शाते हैं। इनमें पहले तीन आकारों में कोई परिवर्तन नही होता। कलियुग का खंभा लम्बाई में अधिक है और इसके ऊपर छत से एक पिंड नीचे लटक रहा है, मान्यता के कथानुसार 7 करोड़ वर्षों में पिंड की लम्बाई 1 ईच बढ़ती है और दोनों पिंडो के मिल जाने पर कलियुग समाप्त हो जायेगा।

 3 : - भारत का प्राचीन स्कन्द पुराण ग्रन्थ और टटोलिये मानस खण्ड के 103वें अध्याय के 273 से 288 तक के श्लोकों में इसका वर्णन मिलता है। ग्रन्थ में गुफ़ा का वर्णन पढ़ कर उपरोक्त मूर्तियां साक्षात जागृत हो जाएंगी।

स्कन्द पुराण मानसखंड 103/10-11  : -

शृण्यवन्तु मनयः सर्वे पापहरं नणाभ्‌ स्मराणत्‌ स्पर्च्चनादेव
पूजनात्‌ किं ब्रवीम्यहम्‌ सरयू रामयोर्मध्ये पातालभुवनेश्‍वर !!

अर्थ : -

ऐसे स्थान का वर्णन करता हूं जिसका पूजन करने के सम्बन्ध में तो कहना ही क्या, जिसका स्मरण और स्पर्श मात्र करने से ही सब पाप नष्ट हो जाते हैं वह सरयू, रामगंगा के मध्य पाताल भुवनेश्‍वर है -  वेद व्यास

पाताल भुवनेश्वर गुफा के बारे में कहा जाता है कि इसमें भगवान शिव का निवास है। सभी देवी-देवता इस गुफा में आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं।

4 :- गुफा के अंदर जाने पर संकरे रास्ते से जमीन के अंदर आठ से दस फीट नीचे जाने पर गुफा की दीवारों पर कई ऎसी आकृतियां नजर आने लगती हैं जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे। यह आकृति एक हंस की है जिसके बारे में यह माना जाता है कि यह ब्रह्मा जी का हंस है।

5 : - गुफा के अंदर हवन कुंड है। इस हवन कुंड के बारे में कहा जाता है कि इसमें जनमेजय ने नाग यज्ञ किया था जिसमें सभी सांप भष्म हो गए थे। केवल तक्षक नाग ही बच गया जिसने राजा परीक्षित को काटा था। कुंड के पास एक सांप की आकृति जिसे तक्षक नाग कहा जाता है।

6 :- पाताल भुवनेश्वर गुफा में एक साथ चार धामों के दर्शन किए जा सकते हैं । ऎसी मान्यता है कि इस गुफा में एक साथ केदारनाथ, बद्रीनाथ, अमरनाथ के दर्शन होते हैं। इसे दुर्लभ दर्शन माना जाता है जो किसी अन्य तीर्थ में संभव नहीं होता।

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Friday, 4 March 2016

भगवान कल्कि कब कहां और कैसे लेंगे अवतार

            भगवान कल्कि कब कहां और कैसे लेंगे अवतार 





‘‘ यदा यदा हिधर्मस्य ग्लार्निभवति भारतः
अभ्युत्थानम धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम,
परित्राणय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्म
संस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे।’’     ....................{भागवत पुराण (स्कंध 12, अध्याय 2)}




पौराणिक मान्यता के अनुसार जब धरती पर पाप की सीमा बढ़ जाएगी तब दुष्टो के विनाश के लिए भगवान कल्कि का अवतार होगा जो विष्णु जी के अवतारों में से एक है । जब लोग धर्म का अनुसरण करना छोड़ देंगे तब ये अवतार होगा ।

कल्कि को विष्णु का भावी और अंतिम अवतार माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार पृथ्वी पर पाप की सीमा पार होने लगेगी तब दुष्टों के संहार के लिए विष्णु का यह अवतार प्रकट होगा। भागवत पुराण में कल्कि अवतार की कथा है।

कथा के अनुसार सम्भल ग्राम में कल्कि का जन्म होगा। अपने माता पिता की पांचवीं संतान कल्कि यथा समय देवदत्त नाम के घोड़े पर आरूढ़ होकर तलवार से दुष्टों का संहार करेंगे। तब सतयुग का प्रारंभ होगा। कल्कि अवतार का स्वरूप और आख्यानों पर अक्सर चर्चा हुई है।

इस अभिव्यक्ति की सघनता और विरलता के अनुसार ही अवतारी शक्तियों के स्तर या कलाएं तय की जाती है। बुद्ध से पहले कृष्ण को सोलह कलाओं का अवतार माना गया। सभी अवतारों नें अपनी तरह से दुष्टों का और उनकी दुष्टता का दलन किया। अब जिस अवतार का इंतजार किया जा रहा है, वह निष्कलंक होगा। कला, कांति, शौर्य और दैवी गुणों में उत्कट।

भागवत में कल्कि का संक्षिप्त विवरण है। उनके चरित और जीवन का विशद वर्णन ‘भागवत पुराण’ में है। अध्येताओं के अनुसार भागवत और कल्किपुराण में अंतिम अवतार के बारे में जो उल्लेख किए गए हैं, वे आलंकारिक हैं।

पुराण के अनुसार कल्कि के पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा। पिता विष्णुयश का अर्थ हुआ, जो सर्वव्यापक परमात्मा की स्तुति करता लोक हितैषी है। सुमति का अर्थ है अच्छे विचार रखने और वेद, पुराण और विद्याओं को जानने वाली महिला।

कल्कि निष्कलंक अवतार हैं। भगवान का स्वरूप दिव्य होता है। दिव्य अर्थात दैवीय गुणों से संपन्न। वे श्वेत अश्व पर सवार हैं। भगवान का रंग गोरा है, परन्तु क्रोध में काला भी हो जाता है। वे पीले वस्त्र धारण किए हैं।

प्रभु के हृदय पर श्रीवत्स का चिह्न अंकित है। गले में कौस्तुभ मणि है। स्वयं उनका मुख पूर्व की ओर है तथा अश्व दक्षिण में देखता प्रतीत होता है। यह चित्रण कल्कि की सक्रियता और गति की ओर संकेत करता है। युद्ध के समय उनके हाथों में दो तलवारें होती हैं।

कल्कि के इस स्वरूप की विवेचना में कहा है कि कल्कि सफेद रंग के घोड़े पर सवार हो कर आततायियों पर प्रहार करते हैं। इसका अर्थ उनके आक्रमण में शांति (श्वेत रंग), शक्ति (अश्व) और परिष्कार (युद्ध) लगे हुए हैं। तलवार और धनुष को हथियारों के रूप में उपयोग करने का अर्थ है कि आसपास की और दूरगामी दोनों तरह की दुष्ट प्रवृत्तियों का निवारण।

कल्कि की यह रणनीति समाज के विचारों, मान्यताओँ और गतिविधियों की दिशाधारा में बदलाव का प्रतीक ही है। इस बार अवतार असुरों या दुष्टों के संहार के बजाय उनके मन मानस को अपने विधान से बदलने की नीति पर आमादा है। 

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Wednesday, 2 March 2016

8 immortals according to hindu mythology in hindi

ये आठ लोग जो अमर हैं और आज भी इस दुनिया मैं मौजूद हैं 




ये हैं वो आठ महापुरुष को आज भी जीवित हैं और अमर हैं -


1.भगवान हनुमान – अंजनी पुत्र हनुमान जी को अजर और अमर रहने के वरदान मिला है तथा इन की मौजूदगी रामायण और महाभारत दोनों जगह पर पाई गई है.रामायण में हनुमान जी ने प्रभु राम की सीता माता को रावण के कैद से छुड़वाने में मदद की थी और महाभारत में उन्होंने भीम के घमंड को तोडा था. सीता माता ने हनुमान को अशोक वाटिका में राम का संदेश सुनाने पर वरदान दिया था की वे सदेव अजर-अमर रहेंगे. अजर-अमर का अर्थ है की उनकी कभी मृत्यु नही होगी और नही वे कभी बूढ़े होंगे. माना जाता है की हनुमान जी इस धरती पर आज भी विचरण करते है.



2.अश्वत्थामा – अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचर्य के पुत्र है तथा उनके मष्तक में अमरमणि विध्यमान है. अश्वत्थामा ने सोते हुए पांडवो के पुत्रो की हत्या करी थी जिस कारण भगवान कृष्ण ने उन्हें कालांतर तक अपने पापो के प्रायश्चित के लिए इस धरती में ही भटकने का श्राप दिया था. हरियाणा के करुक्षेत्र और अन्य तीर्थ में उनके दिखाई दिए जाने के दावे किये जाते है तथा मध्यप्रदेश के बुराहनपुर में उनके दिखाई दिए जाने की घटना प्रचलित है.



3.ऋषि मार्कण्डेय – ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के परम भक्त है. उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपश्या द्वारा महामृत्युंजय तप को सिद्ध कर मृत्यु पर विजयी पा ली और चिरंजीवी हो गए.




4.भगवान परशुराम -परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते है. परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था. परशुराम ने 21 बार इस पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया था. परशुराम का पहले नाम राम था परन्तु इस शिव के परम भक्त थे. उनकी कठोर तपश्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें एक फरसा दिया जिस कारण उनका नाम परशुराम पड़ा.



5.कृपाचार्य -कृपाचार्य शरद्वान गौतम के पुत्र है. वन में शिकार खेलते हुए शांतून को दो शिशु मिले जिनका नाम उन्होंने कृपि और कृप रखा तथा उनका पालन पोषण किया. कृपाचार्य कौरवो के कुलगुरु तथा अश्वत्थामा के मामा है. उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवो को साथ दिया.

6.विभीषण – विभीषण ने भगवान राम की महिमा जान कर युद्ध में अपने भाई रावण का साथ छोड़ प्रभु राम का साथ दिया. राम ने विभीषण को अजर-अमर रहने का वरदान दिया था.




7.वेद व्यास – ऋषि व्यास ने महाभारत जैसे प्रसिद्ध काव्य की रचना करी है. उनके द्वारा समस्त वेदो एवं पुराणो की रचना हुई. वेद व्यास, ऋषि पाराशर और सत्यवती के पुत्र है. ऋषि वेदव्यास भी अष्टचिरंजीवियो में सम्लित है.



8.राजा बलि – राजा बलि को महादानी के रूप में जाना जाता है. उन्होंने भगवान विष्णु के वामन अवतार को अपना सब कुछ दान कर दिया अतः भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल का राजा बनाया और अमरता का वरदान दिया. राजा बलि प्रह्लाद के वंशज है.



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Sunday, 28 February 2016

Healthy Eating Tips According to Sanatan Dharma in Hindi

            भोजन करते वक्त इन बातों का ध्यान रखना जरूरी



भोजन समय पूर्व पांच अंगों (दोनों हाथ, दोनों पैर और मुख) को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। इसके बाद ही भोजन करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि भीगे हुए पैरों के साथ भोजन ग्रहण करना बहुत शुभ माना जाता है। भीगे हुए पैर शरीर के तापमान को नियंत्रित करते हैं, इससे हमारे पाचनतंत्र की समस्त ऊर्जा भोजन को पचाने में लगती है। पैर भिगोने से शरीर की अतिरिक्त गर्माहट कम होती है, जो गैस और एसिडिटी की संभावनाओं को समाप्त कर देती है। इससे स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। इससे आयु में वृद्धि होती है।

भोजन बनने वाले व्यक्ति को स्नान करके और पूरी तरह से पवित्र होकर भी भोजन बनाना चाहिए। खाना बनाते समय मन शांत रखना चाहिए। साथ ही, इस दौरान किसी की बुराई भी ना करें। शुद्ध मन से भोजन बनाएंगे तो खाना स्वादिष्ट बनेगा और अन्न की कमी भी नहीं होगी। भोजन बनाना प्रारंभ करने से पहले इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए। किसी देवी-देवता के मंत्र का जप भी किया जा सकता है। पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन ग्रहण करना चाहिए। इस उपाय से हमारे शरीर को भोजन से मिलने वाली ऊर्जा पूर्ण रूप से प्राप्त होती है। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके भोजन ग्रहण करना अशुभ माना गया है। पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से रोगों की वृद्धि होती है।



कभी भी परोसे हुए भोजन की निंदा नहीं करना चाहिए। इससे अन्न का अपमान होता है। भोजन ग्रहण करने से पहले अन्न देवता, अन्नपूर्णा माता का स्मरण करना चाहिए। देवी-देवताओं को भोजन के धन्यवाद देते हुए खाना ग्रहण करें। साथ ही, भगवान से ये प्रार्थना भी करें कि सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो जाए। थाली को किसी लकड़ी की पाटे पर रखकर भोजन करना चाहिए। खाने बर्तन साफ होने चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। कभी भी बिस्तर पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए। खाने की थाली को हाथ में लेकर भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन बैठकर ग्रहण करना चाहिए।

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